चीन के इरादे नेक नहीं है। कोरोना संक्रमण फैलाने का दोषी चीन अब नई चाल चल रहा है। चीन पिछले कुछ समय से दुनियाभर के देशों में संदिग्ध बीजों के पार्सल भेज रहा है। इन पार्सल्स में ऐसे बीज हैं जो देश की जैव विविधता को खतरे में डाल सकते हैं। चीन ने अब तक अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, जापान सहित कई यूरोपीय देशों में संदिग्ध पैकेट भेजे हैं। जिन पर भ्रामक लेबल लगे हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों, इंडस्ट्री और अनुसंधान संस्थानों को एडवाइजरी जारी कर सर्तक रहने को कहा है।
नई दिल्लीः भारत सरकार ने चीन द्वारा भेजे जा रहे संदिग्ध बीजों के पैकेट को लेकर राज्यों को सर्तक कर दिया है। केंद्र सरकार अपनी रिपोर्ट में कहा कि हो सकता है कि इन बीजों से देश की जैव विविधता को नुकसान पहुंचे। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश में बताया गया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान दुनिया के कई देशों में इस तरह के संदिग्ध बीजों के हजारों पार्सल भेजे गए हैं। अज्ञात स्रोतों से भेजे गये इन पार्सलों पर भ्रामक लेबल लगाया गया है।

- हाइलाइट्स
- चीन भेज रहा संदिग्ध बीजों के पैकेट
- केंद्र सरकार ने राज्यों को किया आगाह
- अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड में सामने आई घटना
- जापान और कुछ यूरोपीय देशों में भी पहुंचे सीड्स पार्सल्स
- पार्सल में लग है भ्रामक लेबल
- खतरे में पड़ सकती है देश की जैव विविधता
एग्रीकल्चर स्मगलिंग है यह
मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का कृषि विभाग ने इसे एग्रीकल्चल स्मगलिंग बताया। उसका कहना है कि संदिग्ध सीड पार्सल्स में ऐसे बीज या पैथोजन हो सकते हैं जो पर्यावरण, खेती और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा सकते हैं। इस तरह के सीड पार्सल देश की जैव विविधता के लिए खतरा हो सकते हैं। इसलिए सभी राज्यों के कृषि विभागों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, सीड एसोसिएशनों, स्टेट सीड सर्टिफिकेशन एजेंसियों, सीड कॉरपोरेशनों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और उसके संस्थानों को ऐसे संदिग्ध पार्सलों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
खतरनाक हो सकते हैं बीज
कृषि मंत्रालय के निर्देश पर टिप्पणी करते हुए फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री इन इंडिया के डायरेक्टर जनरल राम कौदिन्य ने कहा कि अभी यह केवल अलर्ट है कि बीजों के जरिए प्लांट डिसीजेज को फैलाया जा सकता है। इसे सीड टेरोरिज्म कहना ठीक नहीं हैं क्योंकि बीज के जरिए बीमारी फैलाने की सीमाएं हैं। लेकिन फिर भी खतरा तो है। उन्होंने कहा कि ऐसे पार्सल्स के जरिए आने वाले बीज खरपतवार हो सकते हैं जो भारत के मूल पेड़-पौधों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।